दक्षिण भारत का काशी कहे जाने वाले श्री क्षेत्र गोकर्ण (कर्नाटक) में भगवान शिव का अति पवित्र आत्मलिंग स्थापित है। शास्त्रों एवं गरुड़ पुराण के अनुसार गोकर्ण तीर्थ में पितृ कार्य, नारायण नागबली, मोक्ष नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और पिंड दान करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है।
हमारे विद्वान पुरोहित वे. मू. विश्वेश्वर डी. भट गुरु लिंग जी महाबलेश्वर मंदिर परिसर एवं कोटि तीर्थ सरोवर तट पर सर्व विधि-विधान से पूजन संपन्न करवाते हैं।
प्रमुख पूजा सेवाएं (Key Pooja Services)
नारायण नागबली पूजा (Narayan Nagbali)
अकाल मृत्यु, सर्प दोष एवं वंश वृद्धि बाधा निवारण हेतु २-३ दिवसीय संयुक्त महापूजा।
मोक्ष नारायण बलि पूजा (Narayana Bali)
असमय अथवा अपमृत्यु को प्राप्त आत्माओं की शांति और मोक्ष हेतु १ दिवसीय गरुड़ पुराणोक्त विधि।
त्रिपिंडी श्राद्ध (Tripindi Shraddha)
तीन पीढ़ियों के असंतुष्ट पूर्वजों के दोष शमन हेतु तीन पिंड अर्पण विधि।
पिंड दान एवं तर्पण (Pind Daan)
कोटि तीर्थ सरोवर तट पर पितृ शांति हेतु पिंड दान एवं तिल तर्पण।
संपर्क एवं पूजा बुकिंग
पूजा की दक्षिणा, सामग्री एवं रुकने की उत्तम व्यवस्था हेतु सीधे बात करें:
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